बेटियाँ पराया धन

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शीर्षक - बेटियाँ पराया धन



 कविता 1
विषय:- बेटियाँ पराया धन
भगवान की असीम कृपा का फल।
जीस घर में पड़ते लक्ष्मी के कदम।
फिर क्यों कहें बेटियाँ पराया धन?

सौभाग्य माँ बाप का जहाँ लेती बेटी जनम।
जरूर पिछले जनम के कोई पुण्य करम।
फिर क्यों कहें बेटियाँ पराया धन?

परिवार के दुख से उद्विग्न होता जीसका मन।
अपनी खुशबू से महकाती बाबूल का आंगण।
फिर क्यों कहें बेटियाँ पराया धन?

पिता कन्यादान करके पाता है उत्तम फल।
बेटी ही जोडती दोनो घर के बीच कुलसंबंध।
फिर क्यों कहें बेटियाँ पराया धन?

विदा करके पिता अपना फ़र्ज निभाता।
बेटी दुसरा घर सजाकर कर्ज चुकाती।
फिर क्यों कहें बेटियाँ पराया धन?

रश्मी कौलवार.
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