प्रकृती

 Home रचनाकारो की सूची  रचनाएँ  काव्यशास्त्र  Other  रचना भेजे


                प्रकृती                      


©️copyright :   parngya parimita ,bloomkosh के की अनुमति है।इस रचना का प्रयोग    की अनुमति बिना कही नही किया जा सकता है।


शीर्षक - प्रकृति


रचना 4-
 प्रकृति
°°°°°°°°°क्या खूब बनाया है खुदा ने कायनात को,
दिलनशी पौधे हैं यहां जैसे स्वर्ग से आया पारिजात हो।

षट पदों के चूमने से छा रहे हैं कली कली,
रूखे पेड़ पर लटक रही है नवजात सी छिपकली।

लहरा रहे हैं फिज़ा फिज़ा हवाओं के चलन से,
सुनहरे धूप पिघला रहे हैं कोहरों को सिलन से।

हरी चुनरिया पर सिंदूर भर भूमि श्रृंगार करती है,
रात भर सोई सूरजमुखी अब आहिस्ता आहिस्ता निखरती है।






Bloomkosh 

Bloomkosh हिन्दी काव्य webpage है,इस पर बहुत से हिन्दी साहित्य रचनाकारो की रचनाएँ संकलित की गयी है।



हमसे जुड़े



अन्य रचनाएँ 




Terms & conditions     Privacy policy    About us  Contact us    Disclaimer 

No comments:

Post a Comment

क्या तेरा जाना जरुरी था

                  क्या तेरा जाना जरुरी था  बचपन तू मुझे अकेला कर गया,क्या तेरा जाना जरुरी था। यदि हाँ तो साथ ले चलता,क्या मुझे पीछे छोड़ना जर...